मनुष्य-जीवन का
सबसे अनोखा समय
होता है बचपन,
मदमस्त होकर
दिन में खेलता है,
और रात में
चैन से सोता है बचपन।
छोटी-छोटी
सैंकडों इच्छाएं
और भोली-भाली बातें
बोलता है,
कपट-रहित दुनिया
का स्वप्न
संजोता है बचपन,
फेंककर पत्थर
जामुन तोड़ता है ,
पकडम-पकड़ाई
और पोशम्पा का
न्योता है बचपन।
जब मनुष्य
मानवता से गिरता है ,
तो बिलखता है ,
चिल्लाता है,
लहुलुहान होकर
रोता है बचपन,
जब मन की कड़वाहट
छल की
चमकीली पन्नी में
छिपाई जाती है,
तो खट्टी इमली
और मीठे चूरन की तरह
हर दिन
हर पल
खोता है बचपन।
Wednesday, June 10, 2009
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dekha jaye to yehi asli jeevan hota hai.aapne to bachpan ki yaad dila di.bachpan to kisi raj singhaasn se kam nahi hota,
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