Monday, June 15, 2009

चार पल

गिनकर चार पल
उसने
मेरे खाते में डाले ,
और फिर
कर दिया
धरती के हवाले ।
पहले दो पल
गवां दिए मैंने
असफलता के बाद
आँसू बहाने में ,
और बाकी दो पल
गवां दिए
ईर्ष्या में जलने
और शत्रुता बढ़ाने में ।
काश ! किसी ने
सही रास्ता दिखाया होता ,
प्रेम में डूबकर
ये चार पल
अमर हो जाते हैं
बताया होता ।

2 comments:

  1. काश ! किसी ने
    सही रास्ता दिखाया होता ,
    प्रेम में डूबकर
    ये चार पल
    अमर हो जाते हैं
    बताया होता ।
    wah kya vichaar hain
    darasal yahi dunia ki saari samasyaaon ka hal hai kaash ise sab duniawaale samajh jaayen.
    saadhuvaad.
    ye word varification hataa deejiye. comment karne main bahut dikkat hoti hai

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  2. prem me bhi doob kar kabhi kabhi kuch nahi milta .. adbhut likha hai ..

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